CANCER CAPITAL – भारत कैसे बना दुनिया का कैंसर कैपिटल ?

CANCER CAP।TAL – भारत कैसे बना दुनिया का कैंसर कैपिटल ?

दुनिया का कैंसर कैपिटल कौन सा देश है ? अमेरिका, चीन, जापान, ब्राजील, रूस या फिर जापान ? इनमें से कोई भी नहीं । भारत बन चुका है दुनिया का कैंसर कैपिटल (Cancer Capital) । भारत को कैंसर कैपिटल का टाइटल, जो कि अपने आप में कहीं से भी कोई शुभ संकेत नहीं देता, दिया है अपोलो हॉस्पिटल के एक रिपोर्ट ने । यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य दिवस 2024 के दिन पब्लिक की गई थी । हर वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल को मनाया जाता है । इस वर्ष 7 अप्रैल 2024 को अपोलो हॉस्पिटल के द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई और उसे रिपोर्ट में भारत देश को दुनिया का कैंसर कैपिटल (Cancer Capital) होने का टाइटल दिया गया ।
यह खबर सुनकर बहुत बुरा लगता है । लेकिन अपोलो हॉस्पिटल के द्वारा जो रिपोर्ट जारी की गई है, वह कहती है आंकड़े कभी झूठ नहीं कहते । यदि हम आंकड़ों की बात करें, तो रिपोर्ट कहती है –
  • भारत की एक तिहाई आबादी प्री-डायबिटिक (Pre-Diabetic) है । दो तिहाई प्री-हाइपरटेंसिव (Pre-Hypertensive) है । और हर 10 में से एक भारतीय डिप्रेशन (Depression) से जूझ रहा है ।
  • यह क्रॉनिक कंडीशंस (Chronic conditions) डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम और मेंटल हेल्थ समस्याओं सहित एक गंभीर स्तर तक पहुंच रही है और देश के स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल रही है । अपोलो हॉस्पिटल के द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार भारत में कैंसर के मामलों की बेहद तेजी से बढ़ती हुई संख्या काफी चिंता जनक है ।
  • आंकड़ों के अनुसार भारत में पिछले कुछ वर्षों में कैंसर की घटनाएं बेहद तेजी के साथ बढ़ी है । स्थिति इतनी गंभीर हो चली है कि भारत में कैंसर के आंकड़े वैश्विक औसत से भी आगे हो चले हैं । इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य देखभाल संकट की भी चेतावनी दी गई है क्योंकि कम उम्र के बच्चों या लोगों में प्री-डायबिटिक, प्री-हाइपरटेंशन और मेंटल डिसऑर्डर के केस तेजी से बढ़ रहे हैं ।

CANCER CAUSING FACTORS – कैंसर होने के संभावित फैक्टर/कारक – CANCER CAPITAL

  • रिपोर्ट में कैंसर होने के संभावित फैक्टर की भी बात की गई है । इसके अनुसार भारत में कैंसर के ज्यादा केस का आना लाइफस्टाइल (Lifestyle), एनवायरनमेंट(Environment) और सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयां (Socio-Economic problems) जैसे फैक्टर के एक साथ काम करने के कारण है ।
  • उदाहरण के लिए धूम्रपान या अन्य प्रकार के तंबाकू के बड़े पैमाने पर उपयोग से फेफड़े, मुंह और गले के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है ।
  • इसके अलावा वाहनों और उद्योगों से होने वाला वायु प्रदूषण आबादी के एक बड़े हिस्से को कार्सिनोजेनिक पदार्थ (Carcinogenic products – Cancer causing products) के संपर्क में लता है जिससे उनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है ।
  • अपोलो हॉस्पिटल की तरफ से जारी इस रिपोर्ट में कैंसर जैसी भयावह बीमारी के होने के पीछे लाइफस्टाइल और एनवायरमेंट जैसे फैक्टर पर भी काफी जोर दिया गया है ।
  • उदाहरण के लिए – जैसे प्रोसेस्ड फूड (Processed Food – Eg. पनीर , ब्रेड , साल्टेड नट्स , स्नैक्स बियर , वाइन आदि ) का जरूरत से ज्यादा उपभोग, शारीरिक गतिविधि का बिल्कुल कम होना आदि मोटापे की दर को बढ़ाता है । इससे स्तन (Breast Cancer), कोलोरेक्टल (Colorectal cancer) और एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial cancer) होने की संभावना जुड़ी हुई होती है ।
  • रिपोर्ट कहती है कि सामाजिक आर्थिक असमानता समस्या को और बढ़ा देती है। आर्थिक असमानताएं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल जैसे पहलुओं में बाधा उत्पन्न करती हैं । खासकर हाशिये पर रहने वाले समुदायों के लिए, और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए ।
  • इसका सीधा सा अर्थ यह है कि गरीब लोग कैंसर जैसी महंगी बीमारी का उपचार नहीं करा सकते हैं । इसके साथ ही कैंसर के लक्षणों के बारे में बीमारी के बारे में सीमित जागरूकता कार्यक्रमों की कमी के कारण इसका पता जल्दी नहीं लग पाता, यह भी एक बड़ी समस्या है ।
  • इसके कारण कैंसर का पता अक्सर बाद के स्टेज में चलता है और तब तक काफी देर हो चुकी होती है । और बाद के स्टेज में ट्रीटमेंट के सफल होने की संभावना भी काफी कम होती है ।

कैंसर (Cancer) से कैसे बचा जा सकता है ?

  • अच्छी बात यह है कि अपोलो हॉस्पिटल की तरफ से जारी है रिपोर्ट केवल समस्या ही नहीं बताती है बल्कि इसके संभावित उपाय पर भी चर्चा करती है । रिपोर्ट कहती है कि इस जटिल समस्या से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति की जरूरत है । जैसे की देश में अधिक कैंसर विशेषज्ञ (Cancer specialists) , मेडिकल सुविधाओं (Medical facilities) , उपचार केंद्रों (Diagnostic centres) और सस्ती दावों (Low cost medicines) की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए ।
  • साथ ही कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार के संदर्भ में रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देना चाहिए । इसके साथ ही लोगों को तंबाकू के खतरों (Risks associated with tobacco and related products) और स्वस्थ जीवन शैली (Healthy lifestyle) के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहिए एवं शिक्षित भी करना चाहिए ।
  • इस संदर्भ में भारत जैसे देश को बहुत बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है । खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जागरूकता अभियान और जांच को बढ़ावा देने से कैंसर को शुरुआती स्टेज में ही डिटेक्ट किया जा सकता है ।
  • यदि कैंसर जैसी भयावह बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही डिटेक्ट कर लिया जाता है तो इसके ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है । यदि ऐसा होता है तो इन बढ़ते आंकड़ों को भी हम कम करने में कामयाब हो सकते हैं ।
  • इसके अलावा तंबाकू या तंबाकू से जुड़े हुए कोई भी अन्य पदार्थ पर ज्यादा से ज्यादा टैक्स यानी कि कर लगाया जाना चाहिए, सार्वजनिक धूम्रपान पर प्रतिबंध सहित सख्त तंबाकू नियंत्रण नीतियों की आवश्यकता है ।
  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को बढ़ावा देने वाले सार्वजनिक शिक्षा अभियान भी चलाने होंगे क्योंकि यह कैंसर से जुड़े जोखिम कारकों (Cancer causing factors) को काफी कम कर सकते हैं ।
  • वहीं स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को जैसे कि अस्पताल, जांच केंद्र, दवाइयां, एफिशिएंट डॉक्टर आदि की संख्या में बड़े स्तर पर वृद्धि करने की आवश्यकता है । वंचित क्षेत्रों में ऐसा करना और भी ज्यादा जरूरी है ।

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