RBI Monetary Policy 2024 : लोकसभा चुनाव ला रही है महंगाई , EMI में कोई राहत नहीं !

RBI Monetary Policy 2024 : EMI में नहीं मिलेगी कोई राहत, RBI ने किया ऐलान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

5 अप्रैल 2024 को भारत के केंद्रीय बैंक (Central Bank) RBI ने एक बार फिर से रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है । यह लगातार सातवीं बार है जब रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है । यह अनाउंसमेंट आरबीआई (RBI) के वर्तमान गवर्नर श्री शक्तिकांत दास जी के द्वारा की गई  ।

केंद्रीय बैंक (Central Bank) RBI ने अपनी फरवरी की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में लगातार सातवीं बार रेपो रेट को 6.50 फ़ीसदी पर बरकरार रखने का निर्णय लिया है । रेपो रेट में बदलाव होगा या नहीं या होगा तो कितना होगा या नहीं होगा तो क्यों नहीं होगा, यह सारे निर्णय एक कमेटी (RBI Monetary Policy Committee) के द्वारा लिए जाते हैं और उस कमेटी को हम मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (RBI Monetary Policy Committee) कहते हैं ।

एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसा माना जा रहा था कि आरबीआई रेपो रेट में परिवर्तन कर सकती है परंतु लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करके सबको चौंका दिया है । वैसे तो हम इस आर्टिकल में विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे कि रेपो रेट में बदलाव होने से या ना होने से आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है पर फिलहाल के लिए इतना समझ लेना जरूरी है कि चुकी रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है तो आपको EMI में कोई राहत नहीं मिलने वाली है ।

क्या होता है रेपो रेट ?  RBI Monetary Policy 2024

जैसे एक आम इंसान किसी भी बैंक से लोन लेने के लिए जाता है तो उसे किसी न किसी ब्याज दर पर लोन मिलता है । उसी प्रकार से जब कोई बैंक जरूरत के समय पर आरबीआई के पास जाता है ताकि आरबीआई उसकी मदद कर सके तो उस समय आरबीआई भी उस बैंक से रुपयों के बदले ब्याज की मांग करता है । और जिस ब्याज दर पर आरबीआई किसी भी बैंक को जैसे कि एसबीआई (SBI) पीएनबी (PNB) या एचडीएफसी (HDFC) को लोन देता है तो उस ब्याज दर को हम रेपो रेट कहते हैं ।

रेपो रेट (Repo Rate) में बदलाव क्यों किया जाता है ? – RBI Monetary Policy 2024

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था या देश के लोग मूलभूत रूप से दो प्रकार के समय को देखते हैं । एक होता है महंगाई (Inflation) का समय और दूसरा होता है डिफ्लेशन (Deflation) का समय । महंगाई के समय पर ऐसा माना जाता है कि लोग अपनी डिमांड्स (Demands) यानी की मांगों को बढ़ा देते हैं और इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि देश या अर्थव्यवस्था में लोगों के पास पैसे अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं, इसी वजह से वह ज्यादा डिमांड या ज्यादा मांग कर रहे हैं अर्थात ज्यादा खरीद कर कर रहे हैं ।

इसके समानांतर एक तर्क यह भी है कि अल्पकाल में वस्तुओं की आपूर्ति को नहीं बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि किसी भी वस्तु को तैयार करने में समय लगता है । उदाहरण के लिए चावल, दाल, कपड़े, किताबें, मकान आदि को अल्पकाल में नहीं तैयार किया जा सकता । ऐसे में मान लीजिए कि यदि देश में 100 किलो चावल की उपज हुई है और उस चावल को खरीदने के लिए रुपए सिर्फ दो लोगों के पास ही उपलब्ध हैं तो दो लोगों को बड़ी ही आसानी से वह 100 किलो चावल बांटे या बेचे जा सकते हैं ।

 

पर यदि उपज 100 किलो चावल की ही हुई है और 200 लोगों के पास उन चावलों को खरीदने के रुपए हैं तो उस परिस्थिति में चावलों की कीमत बढ़ेगी क्योंकि चावल कम हैं और  खरीददार ज्यादा है । इसके अलावा बेचने वाला भी यह जनता है कि चावल तैयार होने में कम से कम 6 महीने या साल लगेंगे तो ऐसे में वो अधिक कीमत पर बेचेगा और लोग खरीदेंगे भी क्योंकि उनके जेब में खरीद करने के लिए धन मौजूद है ।

ऐसे में अगर आरबीआई को लगता है कि देश या अर्थव्यवस्था महंगाई की समस्या से जूझ रही है तो उस समय पर आरबीआई रेपो रेट को बढ़ा देती है। ऐसा करने से कमर्शियल बैंक्स जैसे कि एसबीआई पीएनबी या एचडीएफसी आरबीआई के पास पैसे मांगने नहीं जाते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि अगर उन्होंने पैसे मांगे तो उन्हें बहुत अधिक मात्रा में आरबीआई को ब्याज चुकाना पड़ेगा। 

तो अभी तक का सारांश यह है कि अगर देश या अर्थव्यवस्था में महंगाई होगी तो आरबीआई रेपो रेट को बढ़ा देगी जिससे की कमर्शियल बैंकों को आरबीआई से कम धन की प्राप्ति होगी और जब उन बैंकों को कम धन की प्राप्ति होगी तो वह मार्केट में लोगों को कम से कम लोन बांट पाएंगे और जब वह लोगों को कम लोन बाटेंगे तो लोगों के पास पैसा कम होगा और जब लोगों के पास पैसा कम होगा तो मांग नीचे आएगी और जब मांग नीचे आएगी तो महंगाई को कंट्रोल किया जा सकेगा । 

ऐसे में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (RBI Monetary Policy Committee) ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का निर्णय लिया है।  इसका मतलब है कि रेपो रेट 6.50 फ़ीसदी पर कायम रहेगा । रेपो रेट में परिवर्तन होने से लोगों को EMI में परिवर्तन देखने को मिलता है। परन्तु आम जीवन अभी और परेशान होने वाला है क्योंकि चुनाव महंगाई बढ़ाने वाली है

लोक सभा चुनाव कैसे लाती है देश में महंगाई ? RBI Monetary Policy 2024

इस समय देश महंगाई से जूझ रहा है और लोक सभा के चुनाव भी होने वाले हैं । सबको पता है कि चुनाव के वक़्त राजनैतिक दल पानी की तरह पैसा बहाते हैं । राजनैतिक दल चुनावों के समय भिन्न-भिन्न खर्च करते हैं, जैसे कि रैली करना , पर्चे छपवाना , टेंट लगवाना , किराए पर माइक लेना , स्कूटर या मोटर गाड़ी सैंकड़ों की संख्या में मंगवा कर रोड मार्च निकालना , और न जाने बहुत से अनगिनत खर्च होते हैं ।

तो जब ये रुपये खर्च होंगे तो वो रुपये कोई न कोई कमाएगा ही , फ़ोटो कॉपी वाले कमाएंगे , टेंट वाले , माइक वाले , दरी वाले ये सब लोग कमाएंगे । जब इनकी आय बढ़ेगी तो देश मे रुपये का बहाव ज्यादा होगा और ऐसे में महंगाई अभी और आसमान छूने वाली है । कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो राजनैतिक दल हज़ारों करोड़ों में खर्च करते हैं, करीब 30 से 40 हजार करोड़ खर्च कर देते हैं चुनाव के समय । एक और रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनियां में सबसे महंगे चुनाव कराने वाले देशों में शामिल है ।

इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा माना जा रहा था कि आरबीआई रेपो रेट के माध्यम से आम जन को राहत देने का निर्णय ले सकती है । पर आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में कोई परिवर्तन न करके सबको चौंका दिया है ।

 

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